चार जनवरी से शेयर बाजार नौ बजे से ही खुलने लगा है। इससे निवेशकों को लाभ मिलने की उम्मीद है,उन्हें कारोबार करने के लिए ज्यदा समय मिलेगा। विशेषकर खुदरा निवेशकों जो कि अधिकाशत: निजी या सरकारी कंपनियों में काम करते है,को सुबह निवेश करने का समय मिल पाएगा।इससे न केवल कारोबार बढ़ेगा बल्कि बाजार का आधार भी बढ़ेगा।
प्रतिस्पर्धा के इस युग में अन्य देशों विशेषकर पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से और भी अधिक निवेश आकर्षित करने में सहायता मिलेगी।इससे भारत पारदर्शिता को बढ़ावा देते हुए वत्तीय क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरेगा।लेकिन मात्र बाजार का समय बढाने भर से ही कारोबार में बढो़तरी नहीं हो जाएगा।
शेयर बाजार की पहुच सभी तक हो सके इसके लिए अनेक सरचनात्मक सुधार करने की जरूरत है।सबसे पहले आम जनता मे शेयर बाजार के संदर्भ में जागरूकता फैलाया जाए।अभी तक भारत की कुल जनसंख्या के केवल एक से ढेढ़ फीसदी लोग ही शेयर बाजार से संबद्ध है। शेयर बाजार से परोक्ष-अपरोक्ष रूप से संबंधित क्षेत्रों ,संस्थाओं से बेहतर ताल-मेल होना भी जरूरी है।अगर बैक दस बजे खुलते है,तो मार्जिन फंड की ब्यवस्था करना मुश्किल होगा।काररोबारी अवधि बढ़ने से शेयर बाजार में काम करने वाले कर्मचारियों,ब्रोंकरों पर दबाव वढेगा।इसे लेकर ब्रोकरों ने तो विरोध करना भी शुरू कर दिया है।इन तमाम समस्याओं को व्यापक रूप में देखे और समझे जाने की आवश्यकता है।वास्तविक रूप में कारोबार बढ़ाना है और शेयर बाजार की पहुच आम जनता तक करना है,तो इन समस्याओं का समाधान करना जरूरी होगा।
Friday, January 8, 2010
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